आज 10 साल बाद भी एक चेहरे को मैं नहीं भुला पाया मेरा और उस का कोई सम्बन्ध नहीं था , सिर्फ एक घंटे की मुलाकात में वो हंसी वो मासूमियत वो चंचलता जिन्दगी भर के लिए दिल पर छप गयी. किस को पता था कि एक घंटे में जिन्दगी में इतना बड़ा मोड़ आएगा। आज जो भी मैं सोचता हूँ या करता हूँ उसमें एक घंटे की मुलाकात का बहुत बड़ा हाथ है।
मेरे हाथों में एक कमल का फूल था जो में खुद तालाब से तोड़ के लाया था और वही ले कर मैं रेल्वे स्टेशन पर अपनी छोटी बहिन और भाई के साथ घर जाने के लिए ट्रेन का इन्तजार कर रहा था कि इतने में उसने आकर पुछा " ये किस का फूल है ?"
मैं ने कहा " कमल का."
वो बोली " नहीं ये तो चमेली का फूल है, मुझे देगा क्या?"
मैंने मना करते हुए कहा " ये तो मैं अपने घर के लिए ले जा रहा हूँ लेकिन ये है कमल का ही, मैं खुद तोड़ के लाया हूँ ."
वो बोली " हमारे गाँव मैं तो इसे चमेली का बोलते है."
मैं ने पुछा "कहाँ की रहने वाली हो तुम ?"
"बंगाल " तपाक से उत्तर आया .
इतने में ही उस की हमउम्र सहेली आ कर बोली " भैया ये झूठ बोल रही है। ये तो यहीं रहती है।
मैं ने पुछा "तुमने झूठ क्यों बोला?"
वो बोली "हमें पकड़ के ले गया तो तू?"
मैं बोला "नहीं मैं क्यों पकड़ने लगा तुम्हे?"
"लेकिन लोग अच्छे नहीं होते ना पकड़ लिया तो ?"
मैं ने कहा " डरो मत मैं नहीं पकडूँगा, लेकिन तुम्हारा नाम तो बताओ ?"
वो बोली " मेरा नाम पायल है इस का नाम रेखा है और ये मेरा छोटा भाई है इसका नाम राकेश है।"
तब तक उस का 3 - 4 साल का भाई भी फटे कपड़ो मैं हाथ मैं कटोरा लिए मेरे पास आ चुका था।
तभी रेखा फिर बोली " झूठ बोल रही है फिर से इस का नाम काजल है और मेरा नाम सरस्वती है।"
मैं थोडा गुस्सा दिखाते हुए बोला " झूठ बोलोगी तो मैं तुम से बात नहीं करूँगा।
तो काजल बोली " अच्छा सॉरी अब नहीं बोलेंगे झूठ।"
तभी मैं ने पुछा "तेरे भाई के कटोरे मैं कौन से भगवान की तस्वीर है?"
वो मासूमियत से बोली " हमें क्या पता ये तो ऐसे ही एक पेड़ के नीचे मिल गयी थी लेकिन इसे देख कर लोग पैसे दे देते है।"
मैं - कितने पैसे कमा लेती हो दिन भर में ?
काजल - 70 - 80 रूपये
मैं - क्या करती हो पैसे का ?
काजल - मम्मी को दे देते हैं।
मैं - क्यों तुम्हारे पापा नहीं कमाते?
काजल - वो तो घर छोड़ के भाग गया।
मैं - मम्मी क्या करती हैं?
काजल - घर चलाती है ना।
हमें तब तक भूख लगने लगी थी क्यों की सुबह से कुछ नहीं खाया था तो सोचा की परांठे निकल के खा लें, मैं ने फिर काजल से पुछा - खाना खाएगी?
काजल - नहीं, हम तो खा के आये हैं।
मैं - हम ने तो सुबह से नहीं खाया।
काजल - ओह, हम तो दिन मैं 3 बार खाते है सुबह 8 बजे फिर 12 बजे फिर शाम को और बीच मैं कोई खिला दे
तो वो अलग।
मैं( एक परांठा आचार से लगा के देते हुए) - फिर तो ये ले ले, एक बार और सही।
झिझकते हुए उस ने ले लिया और हम साथ बैठ कर खाते रहे और ढेर सारी बातें करते रहे। इतने मैं एक पढ़ा लिखा आदमी आया और तेज आवाज में काजल से बोला - "क्यों चिपक रहे हो इन लोगो से, भिखमंगों ! भागो यहाँ से।"
मैं एक दम से बोला - " भाईसाहब बात मैं कर रहा हूँ आप को कोई मतलब?"
वो आदमी मुझे घूरते हुए चला गया। हम खाना खा चुके थे लेकिन माहौल थोडा बदल गया था। मैं ने फिर बात शुरू करने की कोशिश कि
मैं - कितने टाइम से भीख मांग रहे हो?
काजल - पता नहीं जब से छोटे थे तब से
(एक 8 साल की बच्ची बोल रही थी कि जब से छोटे थे तब से, पता नहीं वो कब छोटी थी और कब बड़ी हो के घर सम्भाल ने लगी।)
मैं - भीख क्यों मांगती हो?
काजल कुछ रूआसी हो गयी थी शायद ये सवाल उसे पसंद नहीं आया था उससे खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था। दीवार का सहारा लगते हुए बोली - भीख माँगना कोई आचा लगता है क्या? (तुरंत चहकते हुए बोली) लेकिन जब मैं और मेरा भाई बड़े हो जायेंगे ना तो हम मजदूरी करेंगे और खूब कमाएंगे, भीख नहीं मांगेंगे।
शायद हम तीनों भाई बहिन की आँखों से भी 1 - 2 बूँद निकल आई थी, इस बात को मैं ने और नहीं बढ़ाया, मैं ने पुछा - गिनती आती है?
काजल - 30 तक आती है।
मैं(आश्चर्य करते हुए) - फिर 70 - 80 कैसे गिन लेती हो?
काजल - अरे, 30 - 30 कर के गिन लेंगे ना इतना भी नहीं पता तुझे?
मैं(हँसते हुए) - हाँ, ठीक बोला सॉरी। लेकिन अब तुम 50 तक गिनती सीखना मैं अगली बार मिलूँगा तो पूछुंगा
काजल - ठीक है।
इतने मैं ट्रेन आ गयी, काजल और सरस्वती ने झट से चढ़ के हमारे लिए सीट रोक ली और हम आराम से बैठ गए तो नीचे उतर कर बोली - भैया, बाय तू बढ़िया आदमी है।
मैं - मैं तेरे लिए अगली बार किताब ले कर आऊंगा लेकिन 50 तक गिनती याद करेगी तब।
हमारी ट्रेन चल दी और वो दोनों बच्चियां दूर तक भागते हुए हमें बाय बोलती रही जैसे कोई बहुत गहरा रिश्ता हो। मैं सोचता रह गया कि इस भीख मांगने वाली 8 साल की बच्ची ने मुझसे 1 रुपया भी नहीं माँगा और बदले में कितना कुछ दे गयी।
मन मैं सोचता हूँ कि दोबारा भीख मांगते कभी ना मिले फिर भी नजरें उसे कोटा स्टेशन पर ढूँढती रहती है।
मेरे हाथों में एक कमल का फूल था जो में खुद तालाब से तोड़ के लाया था और वही ले कर मैं रेल्वे स्टेशन पर अपनी छोटी बहिन और भाई के साथ घर जाने के लिए ट्रेन का इन्तजार कर रहा था कि इतने में उसने आकर पुछा " ये किस का फूल है ?"
मैं ने कहा " कमल का."
वो बोली " नहीं ये तो चमेली का फूल है, मुझे देगा क्या?"
मैंने मना करते हुए कहा " ये तो मैं अपने घर के लिए ले जा रहा हूँ लेकिन ये है कमल का ही, मैं खुद तोड़ के लाया हूँ ."
वो बोली " हमारे गाँव मैं तो इसे चमेली का बोलते है."
मैं ने पुछा "कहाँ की रहने वाली हो तुम ?"
"बंगाल " तपाक से उत्तर आया .
इतने में ही उस की हमउम्र सहेली आ कर बोली " भैया ये झूठ बोल रही है। ये तो यहीं रहती है।
मैं ने पुछा "तुमने झूठ क्यों बोला?"
वो बोली "हमें पकड़ के ले गया तो तू?"
मैं बोला "नहीं मैं क्यों पकड़ने लगा तुम्हे?"
"लेकिन लोग अच्छे नहीं होते ना पकड़ लिया तो ?"
मैं ने कहा " डरो मत मैं नहीं पकडूँगा, लेकिन तुम्हारा नाम तो बताओ ?"
वो बोली " मेरा नाम पायल है इस का नाम रेखा है और ये मेरा छोटा भाई है इसका नाम राकेश है।"
तब तक उस का 3 - 4 साल का भाई भी फटे कपड़ो मैं हाथ मैं कटोरा लिए मेरे पास आ चुका था।
तभी रेखा फिर बोली " झूठ बोल रही है फिर से इस का नाम काजल है और मेरा नाम सरस्वती है।"
मैं थोडा गुस्सा दिखाते हुए बोला " झूठ बोलोगी तो मैं तुम से बात नहीं करूँगा।
तो काजल बोली " अच्छा सॉरी अब नहीं बोलेंगे झूठ।"
तभी मैं ने पुछा "तेरे भाई के कटोरे मैं कौन से भगवान की तस्वीर है?"
वो मासूमियत से बोली " हमें क्या पता ये तो ऐसे ही एक पेड़ के नीचे मिल गयी थी लेकिन इसे देख कर लोग पैसे दे देते है।"
मैं - कितने पैसे कमा लेती हो दिन भर में ?
काजल - 70 - 80 रूपये
मैं - क्या करती हो पैसे का ?
काजल - मम्मी को दे देते हैं।
मैं - क्यों तुम्हारे पापा नहीं कमाते?
काजल - वो तो घर छोड़ के भाग गया।
मैं - मम्मी क्या करती हैं?
काजल - घर चलाती है ना।
हमें तब तक भूख लगने लगी थी क्यों की सुबह से कुछ नहीं खाया था तो सोचा की परांठे निकल के खा लें, मैं ने फिर काजल से पुछा - खाना खाएगी?
काजल - नहीं, हम तो खा के आये हैं।
मैं - हम ने तो सुबह से नहीं खाया।
काजल - ओह, हम तो दिन मैं 3 बार खाते है सुबह 8 बजे फिर 12 बजे फिर शाम को और बीच मैं कोई खिला दे
तो वो अलग।
मैं( एक परांठा आचार से लगा के देते हुए) - फिर तो ये ले ले, एक बार और सही।
झिझकते हुए उस ने ले लिया और हम साथ बैठ कर खाते रहे और ढेर सारी बातें करते रहे। इतने मैं एक पढ़ा लिखा आदमी आया और तेज आवाज में काजल से बोला - "क्यों चिपक रहे हो इन लोगो से, भिखमंगों ! भागो यहाँ से।"
मैं एक दम से बोला - " भाईसाहब बात मैं कर रहा हूँ आप को कोई मतलब?"
वो आदमी मुझे घूरते हुए चला गया। हम खाना खा चुके थे लेकिन माहौल थोडा बदल गया था। मैं ने फिर बात शुरू करने की कोशिश कि
मैं - कितने टाइम से भीख मांग रहे हो?
काजल - पता नहीं जब से छोटे थे तब से
(एक 8 साल की बच्ची बोल रही थी कि जब से छोटे थे तब से, पता नहीं वो कब छोटी थी और कब बड़ी हो के घर सम्भाल ने लगी।)
मैं - भीख क्यों मांगती हो?
काजल कुछ रूआसी हो गयी थी शायद ये सवाल उसे पसंद नहीं आया था उससे खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था। दीवार का सहारा लगते हुए बोली - भीख माँगना कोई आचा लगता है क्या? (तुरंत चहकते हुए बोली) लेकिन जब मैं और मेरा भाई बड़े हो जायेंगे ना तो हम मजदूरी करेंगे और खूब कमाएंगे, भीख नहीं मांगेंगे।
शायद हम तीनों भाई बहिन की आँखों से भी 1 - 2 बूँद निकल आई थी, इस बात को मैं ने और नहीं बढ़ाया, मैं ने पुछा - गिनती आती है?
काजल - 30 तक आती है।
मैं(आश्चर्य करते हुए) - फिर 70 - 80 कैसे गिन लेती हो?
काजल - अरे, 30 - 30 कर के गिन लेंगे ना इतना भी नहीं पता तुझे?
मैं(हँसते हुए) - हाँ, ठीक बोला सॉरी। लेकिन अब तुम 50 तक गिनती सीखना मैं अगली बार मिलूँगा तो पूछुंगा
काजल - ठीक है।
इतने मैं ट्रेन आ गयी, काजल और सरस्वती ने झट से चढ़ के हमारे लिए सीट रोक ली और हम आराम से बैठ गए तो नीचे उतर कर बोली - भैया, बाय तू बढ़िया आदमी है।
मैं - मैं तेरे लिए अगली बार किताब ले कर आऊंगा लेकिन 50 तक गिनती याद करेगी तब।
हमारी ट्रेन चल दी और वो दोनों बच्चियां दूर तक भागते हुए हमें बाय बोलती रही जैसे कोई बहुत गहरा रिश्ता हो। मैं सोचता रह गया कि इस भीख मांगने वाली 8 साल की बच्ची ने मुझसे 1 रुपया भी नहीं माँगा और बदले में कितना कुछ दे गयी।
मन मैं सोचता हूँ कि दोबारा भीख मांगते कभी ना मिले फिर भी नजरें उसे कोटा स्टेशन पर ढूँढती रहती है।
