Wednesday, December 30, 2009

गुजारिश

ए खिलती हुयी कली सी, मेरे दिल की शहजादी
ए रोशन सी बाती, मेरे खयालो की मलिका

खोया हु तुझ में, ये जिन्दगी पाने के लिए
लाया हु तुझको अपना बनाने के लिए

ओ मुस्कुराती गुडिया तू जादू की पुडिया
बाँधी है तुझ से ये जिन्दगी की लडिया

एक पगलू सा लड़का हू संभालो मुझे
एक नन्हा सा परिंदा हू दो आशियाना मुझे

गुजारिश है तुम से बस इतना कर दो
रहो मेरे दिल में मेरे घर को स्वर्ग कर दो

Wednesday, December 9, 2009

पार्थ दीपक

हम दीपक है हम जलते है,
हम अन्धकार के तल पर है
हम है प्रकाश के पुन्यार्जक,
हम है सृष्टि के मार्गदर्शक
हम है अग्नि हम है ज्वाला,
हम उर्ध्वा गामी पथ की शाला
हम आलोकित हो धरती पर पहनते तेजस की जयमाला
हम पार्थ अभिनंदित दीप माला

Tuesday, March 24, 2009

khawab 2

ए खवाब मैं तुझ से क्या कहू
तू अगर मेरी जिन्दगी का हिस्सा न होता

ये रात इतनी खूबसूरत न होती
ये शाम किसी के इन्त्जारों मैं न गुजरती
वो समंदर पर महल न होता
वो बादलो पर कार न चलती
मछलियो के पर न लगते
पेडो के पैर न होते
ए खवाब मैं तुझ से क्या कहू
तू अगर मेरी जिन्दगी का हिस्सा न होता

ये फूल आपस मैं बाते न करते
ये चाँद काला चश्मा न पहनता
ये झरने पहाडो पर ऊपर न बहते
इन बारिश की बूंदों मैं छोटा सा संसार न होता
एक कागज़ की कश्ती मैं हम नदियों की सैर न करते
एक लकडी के घोडे पर गुड्डे की बारात न होती
ए खवाब मैं तुझ से क्या कहू
तू अगर मेरी जिन्दगी का हिस्सा न होता
तो ये जिन्दगी एक नीरस सी कहानी का हिस्सा होती
शुक्र गुजार हु तेरा
अगर तू मेरी जिन्दगी का हिस्सा न होता
मेरी मुस्कुराह्ट का कोई जरिया न होता.


Friday, February 13, 2009

chota hai par gahra hai

1. Bolne ko to bahut hai par ham bolte nahi
kya tunhe aankho ki juba padhna nahi aata?

2. Likhna to bahut chaha par kabhi likha nahi
kyoki tumhe padhne ki taalim nahi thi

3. daude bahut hai unhe paane ko
pata nahi hai shayad mrig marichika hai

4. Aavaj meri or likha karti ho tum
do jism or ek jaan kahi ise hi to nahi kahte?

5. Ek jhoka hava ka aata hai
jaane kya kah jaata hai
kuch aankhe nam kar jaata hai
fir jaane kaha kho jaata hai.

khawab

ek sundar sapna dekha hai
kuch ud kar jaana socha hai,
door kahi ek jungle main
aisa aashiyana dekha hai

Phool khile hai Ped hare hai
ek nadiya hai, ek jharna hai
kuch baadal hai kuch boonde hai
sab mahak raha hai sab aacha hai
sundar sa ek ghar apna hai
mera sapna kuch aisa hai.

Ham ude parinde, vo paana hai
ham chale, Tufaano se takrana hai
chote par hai,path lamba hai
par sahas hai or vo gahra hai
ham badhe raasta banta hai
ham chale aasma jhukta hai
ham door chor ke raahi hai
chalte hai thokar bhi khai hai

chalo aao ek naya sapno ka sansaar banaye