Wednesday, September 7, 2011

ab kis ko kahu main....

आज घर से न निकलता तो अच्छा होता 
राहों पे न चलता तो अच्छा होता
क्या पता था जो लोग मिले थे वो यूँ बिछुड़ जायेंगे 
उन लोगों से न मिलता तो अच्छा होता

आज एक डर सा बैठने लगा है 
इन धमाकों में हर अपना सा बिछुड़ने लगा है
हर सांस थमने लगी है, लहू बिखरने लगा है
 अब किस को कहू मैं, हर दिया तो बुझने लगा है







Saturday, September 3, 2011

ye kis kranti ki shuruvat hai??

ये किस तूफ़ान से पहले की बात है ??
ये किस क्रांति की शुरुवात है ??
क्या ये दुनिया को बदलने की बात है ??
या फिर खुद सुधरने की शुरुवात है ??

ये भीड़ क्यों जमा है ??
वो तख्त पर माइक ले के क्यों खड़ा है ??
क्यों आज नारों से देश गूंजा है ??
क्या ये हमारे अन्दर की आवाज है ??

ये किस तूफ़ान से पहले की बात है ??
ये किस क्रांति की शुरुवात है ??