Wednesday, September 7, 2011

ab kis ko kahu main....

आज घर से न निकलता तो अच्छा होता 
राहों पे न चलता तो अच्छा होता
क्या पता था जो लोग मिले थे वो यूँ बिछुड़ जायेंगे 
उन लोगों से न मिलता तो अच्छा होता

आज एक डर सा बैठने लगा है 
इन धमाकों में हर अपना सा बिछुड़ने लगा है
हर सांस थमने लगी है, लहू बिखरने लगा है
 अब किस को कहू मैं, हर दिया तो बुझने लगा है







Saturday, September 3, 2011

ye kis kranti ki shuruvat hai??

ये किस तूफ़ान से पहले की बात है ??
ये किस क्रांति की शुरुवात है ??
क्या ये दुनिया को बदलने की बात है ??
या फिर खुद सुधरने की शुरुवात है ??

ये भीड़ क्यों जमा है ??
वो तख्त पर माइक ले के क्यों खड़ा है ??
क्यों आज नारों से देश गूंजा है ??
क्या ये हमारे अन्दर की आवाज है ??

ये किस तूफ़ान से पहले की बात है ??
ये किस क्रांति की शुरुवात है ??


Wednesday, August 10, 2011

हर पल एक कसक सी जागती है 
ये किस्मत उस पल को कहा ले भागती है

बीते पलों को याद किया करता हूँ 
आने वाले पलों के सपने बुना करता हूँ
फिर कभी हँसता हूँ तो कभी रोया करता हूँ
क्या पता किस पल मैं मौत आती है 
इंसान के इरादों को झोंक चली जाती है

सीख रहा हूँ कुछ इस पल में जीना 
इस पल में हँसना इस पल में खिलना 
इस पल में करता हूँ इस पल में पाता हूँ
इस पल में सपनों को साकार बनाता हूँ
इस पल में तुष्टि है इस पल में सृष्टि है
ये पल ही जीवन में खुशियों की घुट्टी है.

Wednesday, July 27, 2011

kaha kho gayi

सोचता हूँ वो हंसी कहाँ गयी.....
वो मुस्कुराहट वो ख़ुशी कहाँ गयी......
वो खुशबू भरी फिजा कहाँ गयी...
और बसंत मे भी पतझड़ कैसे हो गयी....

सोचता हूँ ये क्या खो गया....
वो अपना पन कहाँ रह गया...
वो जिन्दगी बेमानी क्यों लगने लगी...
और हर बात परेशानी क्यों बन ने लगी...

सोचता हूँ कहा से ढूँढ कर लाऊं.....
वो खुशियों की बारिश को कैसे बरसाऊ....
वो पतझड़ के पत्तो से फिर से बाग़ लगाऊ...
और फिर से जियूं फिर से मुस्कुराऊ......

Wednesday, March 16, 2011