Friday, July 13, 2012

O rain

ए बारिश तू मत बरस
उन बिन कपड़ो के लोगो को देख
वो कचरे के ढेर में कुछ ढूँढ़ते बच्चो को देख
प्लास्टिक की छतों के नीचे रहने वाले लोगो को देख
वो खुले में सड़ते अनाज को देख
उस भूख से मरती आवाज को देख
क्या तुझे भी बेघर, बेसहारा लोगों को देख दया नहीं आती?
क्या तुझे भी बिना कपड़ो वाले सूखे शरीरों को देख दया नहीं आती?

ए बारिश तू फिर बरस
उन नालों पे बड़े घर बनाने वालो पे बरस
उन जंगलों को काट कर बेचने वालो पे बरस
उन वहशियों की बढती दरिंदगी से पहले
ए बारिश तू फिर बरस
मिटा दे उन लोगों को बहा दे उन अतिक्रमणों को
जो किसी दुसरे इंसान की छाती पे हुआ हो।


1 comment:

  1. Awesome.. Super Like..!!!!
    TU ek collection publish kar... of your pieces.. it will sell great..

    ReplyDelete